एम एस एम ई मंत्रालय की हिंदी सलाहकार समिति की बैठक आयोजित, ‘उद्यमी मित्र’ और ‘उद्यम प्रभा’ पत्रिकाओं का विमोचन
एम एस एम ई मंत्रालय की हिंदी सलाहकार समिति की बैठक में 'उद्यमी मित्र' और 'उद्यम प्रभा' पत्रिकाओं का विमोचन किया गया, जिसका उद्देश्य छोटे और मध्यम उद्यम क्षेत्र को हिंदी माध्यम से सशक्त बनाना है।
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शनिवार, 31 अक्टूबर 2026 को एम एस एम ई मंत्रालय ने एक महत्वपूर्ण पहल की घोषणा की है। मंत्रालय की हिंदी सलाहकार समिति की बैठक का आयोजन किया गया, जिसके दौरान दो नई पत्रिकाओं का विमोचन किया गया। ये पत्रिकाएं 'उद्यमी मित्र' और 'उद्यम प्रभा' हैं। इस घटनाक्रम ने छोटे, मध्यम और सूक्ष्म उद्यम (एम एस एम ई) क्षेत्र में हिंदी भाषा को बढ़ावा देने और उद्यमियों तक तकनीकी जानकारी को सरल भाषा में पहुंचाने के संकल्प को दोहराया है।
बैठक में विभिन्न हितधारकों ने हिंदी में तकनीकी शब्दावली के मानकीकरण और उद्योग नीतियों के हिंदी अनुवाद के महत्व पर गहन विचार-विमर्श किया। एम एस एम ई मंत्रालय के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि 'उद्यमी मित्र' पत्रिका का मुख्य उद्देश्य नवभरत उद्यमियों को व्यावसायिक सलाह, सरकारी योजनाओं की जानकारी और बेस्ट प्रैक्टिसेज से जोड़ना है। इस पत्रिका को ऐसे रूप में डिज़ाइन किया गया है कि यह उद्यमियों के लिए एक विश्वसनीय साथी या 'मित्र' की भूमिका निभाए।
दूसरी ओर, 'उद्यम प्रभा' पत्रिका का प्रकाशन उद्योग क्षेत्र की तेज़ी से बदलती हुई प्रवृत्तियों, नवीन तकनीकों और मार्केट ट्रेंड्स को प्रकाश में लाने के लिए किया गया है। इस पत्रिका के माध्यम से मंत्रालय उन उद्यमियों तक पहुंचना चाहता है जो अंग्रेज़ी में उपलब्ध तकनीकी रिपोर्ट्स और विश्लेषणों को समझने में कठिनाई का अनुभव करते हैं। हिंदी सलाहकार समिति के सदस्यों ने सुझाव दिया कि इन पत्रिकाओं में क्षेत्रीय भाषाओं के संदर्भों को भी शामिल किया जा सकता है, ताकि देश के विभिन्न कोनों में फैले एम एस एम ई इकाइयों तक इनकी प्रभावशाली उपलब्धता सुनिश्चित हो सके।
बैठक में यह भी तय किया गया कि इन पत्रिकाओं का वितरण डिजिटल और प्रिंट दोनों माध्यमों से किया जाएगा। एम एस एम ई मंत्रालय की हिंदी सलाहकार समिति ने सुनिश्चित किया कि पत्रिकाओं में प्रकाशित होने वाली जानकारी सटीक, समय से पहले और व्यावहारिक हो। उद्यमियों की भाषा में बात करना सरकार की अग्रिम प्राथमिकताओं में से एक है, क्योंकि यह कारोबार में अक्षर साक्षरता की कमी को दूर करने में सहायक साबित होती है।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित व्यापार विशेषज्ञों ने इस कदम की सराहना करते हुए कहा कि 'उद्यमी मित्र' और 'उद्यम प्रभा' जैसी प्रकाशन व्यवस्थाएँ एम एस एम ई सेक्टर के विकास में एक नई शुरुआत का प्रतीक हैं। हिंदी सलाहकार समिति ने आगे की बैठकों की तारीखों और पत्रिकाओं के नियमित प्रकाशन के शेड्यूल पर भी सहमति जताई। यह पहल देश भर के उद्यमियों के बीच हिंदी को एक व्यावसायिक माध्यम के रूप में स्थापित करने के प्रयासों को एक नई दिशा प्रदान करेगी, जिससे उद्योग नीतियों का लाभ अधिकतम स्तर पर प्राप्त किया जा सके। मंत्रालय ने घोषणा की कि आगामी तिमाही में इन पत्रिकाओं के विशेष अंक भी प्रकाशित किए जाएंगे, जो विशिष्ट उद्योग खंडों पर केंद्रित होंगे।