भारत की राष्ट्रपति नासिक में सिंहस्थ महाकुंभ के ध्वज-स्तंभ पूजन, ध्वजा पूजन और ध्वजारोहण समारोह में सम्मिलित हुईं
भारत की राष्ट्रपति ने नासिक में आयोजित सिंहस्थ महाकुंभ के उद्घाटन समारोहों में भाग लिया, जिसमें ध्वज-स्तंभ पूजन, ध्वज पूजन और ध्वजारोहण शामिल थे।
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भारत की राष्ट्रपति ने रविवार, 1 नवंबर 2026 को महाराष्ट्र के नासिक स्थित त्रयंबकेश्वर मंदिर परिसर में आयोजित सिंहस्थ महाकुंभ के शुभारंभ के प्रमुख अनुष्ठानों में सम्मिलित होकर कर्तव्य निर्वहन किया। इस ऐतिहासिक अवसर पर राष्ट्रपति ने ध्वज-स्तंभ पूजन, ध्वजा पूजन तथा ध्वजारोहण समारोहों में भाग लिया, जिससे कुंभ मेले को आधिकारिक रूप से प्रारंभ किया गया।
समस्त अनुष्ठान गहन धार्मिक वातावरण और भक्ति भावना के माहौल में संपन्न हुए। राष्ट्रपति ने पहले पवित्र गंगाजल से स्नान करके ध्वज-स्तंभ का पूजन किया। इसके पश्चात, उन्होंने स्वयं ध्वज को पूजा अर्चना की प्रक्रिया से गुज़ारा, जो कुंभ की आध्यात्मिक शुद्धता और सनातन धर्म की वैभवशाली परंपराओं का प्रतीक है। अंत में, ध्वजारोहण क्रिया का अनुष्ठान किया गया, जिससे सिंहस्थ महाकुंभ को एक नई ऊंचाई पर पहुंचाते हुए उसकी आध्यात्मिक यात्रा का आरंभ हुआ।
नासिक शहर में कुंभ की तैयारियों को देखते हुए सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर कड़ी गिरदावरी जमाई गई थी। स्थानीय प्रशासन और पुलिस बलों ने सुचारू रूप से कार्यक्रम का आयोजन सुनिश्चित किया। लाखों श्रद्धालुओं और आस्थावानों ने इस ऐतिहासिक क्षण को साक्षी बने रहने के लिए परिसर में जमावड़ा लगाया था। वक्ताओं और आचार्यों ने अपने भाषणों में कुंभ के आध्यात्मिक महत्व, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक एकजुटता के संदेशों पर प्रकाश डाला।
राष्ट्रपति की इस यात्रा को देशभर में व्यापक आभार प्रकट किया गया है। सिंहस्थ महाकुंभ केवल एक धार्मिक समारोह नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति के एक महत्वपूर्ण पहलू को दर्शाता है, जो सदियों पुरानी परंपराओं को जीवित रखता है। नासिक में यह आयोजन पर्यटन और आध्यात्मिक यात्रा के नए आयाम स्थापित करने में सहायक सिद्ध होगा। स्थानीय पंचायतें और व्यापारी मंडल इस कुंभ से होने वाले आर्थिक लाभ और क्षेत्रीय विकास की उम्मीद जता रहे हैं।
समाचार संस्थाओं की रिपोर्ट्स के अनुसार, ध्वजारोहण के बाद कुंभ क्षेत्र में मंदिरों और घाटों की संख्या और भी बढ़ाई गई है, जहाँ श्रद्धालु पवित्र स्नान कर सकते हैं। यह प्रक्रिया अगले कुछ महीनों तक चलेगी, जिसके दौरान विभिन्न धार्मिक सभाएं, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और आध्यात्मिक चर्चाएं आयोजित होंगी। भारत की राष्ट्रपति द्वारा इस समारोह में भाग लेना देश के धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का प्रतीक है। नासिक में यह कुंभ मेला विदेशी और भारतीय दोनों श्रद्धालुओं के लिए एक आकर्षण का केंद्र बनने की संभावना है।
कुल मिलाकर, सिंहस्थ महाकुंभ के उद्घाटन समारोह एक सफलतापूर्वक संपन्न हुए, जिसमें श्रद्धा, भावना और व्यवस्था का एक अनोखा संगम देखने को मिला। यह आयोजन नासिक की ऐतिहासिक पहचान को वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित करने का एक महत्वपूर्ण कदम है।