प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती के अवसर पर आयोजित राष्ट्रीय एकता दिवस समारोह में भाग लिया
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 31 अक्टूबर को आयोजित किए गए राष्ट्रीय एकता दिवस समारोह में भाग लिया, जिससे सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती मनाई गई। इस अवसर पर देशभर में एकता, अखंडता और सामाजिक सद्भाव की मजबूत नींव पर गौरव की गई।
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वर्तमान समय में जब राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एकता व अखंडता की आवश्यकता विशेष रूप से महसूस की जा रही है, तब प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 31 अक्टूबर, 2026 को आयोजित राष्ट्रीय एकता दिवस समारोह में शामिल होकर देशवासियों को सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती पर शुभकामनाएं दीं। यह दिवस न केवल एक व्यक्ति की जयंती के रूप में मनाया जाता है, बल्कि यह भारतीय संघवाद, राष्ट्रीय एकजुटता और सामाजिक सद्भाव के संकल्प को पुनः सुदृढ़ करने का दिवस है।
सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती के इस विशेष अवसर पर, प्रधानमंत्री ने उनका याद किया जिन्होंने स्वतंत्र भारत के निर्माण में 'लोहे के इंसान' के रूप में अहम भूमिका निभाई थी। उन्होंने तब पंजाब, बॉम्बे, मद्रास, बिहार, बंगाल, असम, मध्य प्रदेश, बड़ौदा, हैदराबाद, मेसौर, त्रिपुरा, जम्मू और कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, मणिपुर, मिजोरम, नागालैंड, तेलंगाना, कर्नाटक, छत्तीसगढ़, गोवा, चंडीगढ़, दादरा और नगर हवेली, दमण और दीव, डी.डी.उ. और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, लद्दाख सहित सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लोगों को एकत्र किया था।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने समारोह में भाग लेते हुए कहा कि सरदार पटेल की दूरदर्शिता आज भी भारतीय राजनीति और समाज के लिए एक रोशनी का स्रोत है। उन्होंने तब जब देश शत-धराशय हो चुका था, तब एकता की मजबूत नींव रखी थी। आज, 2026 के संदर्भ में, राष्ट्रीय एकता दिवस का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आने वाली पीढ़ियां इस संकल्प को कभी न भूलें कि भारत की ताकत उसकी विविधता में है, लेकिन उसकी अभिव्यक्ति एकता में है।
समारोह के दौरान, देश के विभिन्न हिस्सों से आए युवाओं ने सरदार पटेल के जीवन और विचारों पर प्रकाश डालते हुए प्रस्तुतियां दीं। उन्होंने स्मरण कराया कि सरदार वल्लभभाई पटेल के नेतृत्व में 562 राज्यों को एक भारत में मिलाया गया था, जिससे आज 1.4 अरब जनसंख्या वाला विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र बन पाया है। प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर देशवासियों से अपील की कि वे अपने-अपने विभागों, समाजों और समुदायों में एकता और परस्पर सहयोग का संदेश फैलाएं।
राष्ट्रीय एकता दिवस के इस आयोजन ने एक बार फिर साबित कर दिया कि भारत में क्षेत्रीय, भाषाई, धार्मिक और सामाजिक भेदभाव को पार कर एक राष्ट्र के रूप में बंधे रहना ही हमारा सबसे बड़ा संपदा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के इस महत्वपूर्ण दिन पर भाग लेने से देश में उत्साह का माहौल बना, जिसमें सभी राज्यों की जनता के बीच एकता का संदेश व्याप्त हुआ। सरदार पटेल की 151वीं जयंती का यह अवसर न केवल यादगार रहा, बल्कि भविष्य के लिए भी एक प्रेरणादायक दिशा-निर्देश प्रस्तुत किया।