लोक सभा अध्यक्ष ने ब्रिक्स संसदों से मानवीय निगरानी को सर्वोपरि रखते हुए नैतिक, उत्तरदायी और पारदर्शी तकनीक को बढ़ावा देने का आह्वान किया
लोकसभा के अध्यक्ष ने ब्रिक्स संसदों के बीच मानवीय निगरानी को प्राथमिकता देते हुए, नैतिक, उत्तरदायी और पारदर्शी प्रौद्योगिकी के विकास को बढ़ावा देने का आह्वान किया। इस कदम से डिजिटल युग में नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिये एक नया मानक स्थापित करने की आशा जताई गई।
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भारत की लोकसभा के अध्यक्ष ने आज ब्रिक्स (ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ़्रीका) की पाँच प्रमुख संसदों के बीच एक ऐतिहासिक सम्मेलन के दौरान मानवीय निगरानी और नैतिक प्रौद्योगिकी के महत्व पर प्रकाश डाला। इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि डिजिटल तकनीक का विकास मानवाधिकारों, पारदर्शिता और उत्तरदायित्व के सिद्धांतों के अनुरूप हो।
अध्यक्ष ने कहा, “हमारा डिजिटल भविष्य केवल तकनीकी नवाचार पर निर्भर नहीं है, बल्कि यह इस पर भी निर्भर करता है कि हम इसे कैसे नियंत्रित और विनियमित करते हैं। हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हर नई तकनीक मानवता के हित में काम करे और किसी भी प्रकार के दुरुपयोग से सुरक्षित रहे।” उन्होंने विशेष रूप से एआई, बायोमेट्रिक्स और डेटा प्रबंधन के क्षेत्रों में मानवीय निगरानी की आवश्यकता पर बल दिया।
सम्मेलन में भाग लेने वाले ब्रिक्स के प्रतिनिधि ने भी इसी दिशा में अपनी सहमति व्यक्त की। रूस के विदेश मंत्री ने बताया कि रूस सरकार ने हाल ही में एआई प्रणालियों के लिए एक नया नैतिक ढांचा अपनाया है, जिसमें पारदर्शिता और जवाबदेही के प्रावधान शामिल हैं। चीन के साइबर सुरक्षा अधिकारी ने उल्लेख किया कि चीन ने डिजिटल पहचान प्रणालियों में नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए नई नीतियाँ लागू की हैं। दक्षिण अफ़्रीका के संसद सदस्य ने यह रेखांकित किया कि डेटा गोपनीयता और डिजिटल समावेशन के क्षेत्र में उनके देश ने महत्वपूर्ण प्रगति की है।
भारत पक्ष से, सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री ने भी अपनी भूमिका निभाई। उन्होंने बताया कि भारत में डिजिटल इंडिया पहल के तहत 2025 तक सभी नागरिकों के लिए डिजिटल साक्षरता और सुरक्षित ऑनलाइन सेवाओं की पहुँच सुनिश्चित करने के लिए कार्य किया जा रहा है। इसके अलावा, भारत ने एआई के नैतिक उपयोग के लिए एक राष्ट्रीय समिति की स्थापना की है, जो अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप नीतियाँ तैयार कर रही है।
अध्यक्ष ने इस सम्मेलन को “मानव-केंद्रित डिजिटल विकास” के लिए एक नया मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स के पाँच देशों को मिलकर एक वैश्विक ढांचा तैयार करना चाहिए, जो न केवल तकनीकी प्रगति को प्रोत्साहित करे, बल्कि मानवाधिकारों और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा भी करे।
इस बैठक के दौरान, ब्रिक्स के सदस्य देशों ने एक संयुक्त वक्तव्य जारी किया, जिसमें उन्होंने “मानवीय निगरानी, पारदर्शी एल्गोरिदम और जवाबदेह डेटा प्रबंधन” को प्रमुख प्राथमिकताएँ घोषित की। वक्तव्य में यह भी कहा गया कि सभी सदस्य देश एक साथ मिलकर डिजिटल युग में मानवाधिकारों की रक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाएँगे।
अध्यक्ष ने अपनी बात समाप्त करते हुए यह संदेश दिया कि “डिजिटल तकनीक के विकास के साथ-साथ हमें यह भी सुनिश्चित करना होगा कि यह विकास सभी के लिए लाभकारी हो और किसी भी समूह को बाहर न करे।” उन्होंने इस पहल को भारतीय जनता के लिए आशा के रूप में प्रस्तुत किया, यह कहते हुए कि “हमारा लक्ष्य है कि डिजिटल दुनिया में सभी नागरिकों को समान अवसर मिले और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित हो।"
इस सम्मेलन के बाद, ब्रिक्स के पाँच देशों के बीच एक कार्य समूह गठित किया जाएगा, जो नैतिक तकनीकी नीतियों के कार्यान्वयन के लिए ठोस कदम उठाएगा। यह पहल वैश्विक स्तर पर डिजिटल शासन के नए मानदंड स्थापित करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।