नई दिल्ली में ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में प्रधानमंत्री के संबोधन का मूल पाठ
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली में आयोजित ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में अहम संबोधन दिया। उन्होंने भारत के भविष्य के अर्थव्यवस्था की नींव, नवाचार और वैश्विक सहयोग पर जोर देते हुए देश के औद्योगिक रूपांतरण की दृष्टि प्रस्तुत की।
Journalism India··0 व्यूज़·3 मिनट पढ़ें
नई दिल्ली में आयोजित प्रतिष्ठित ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम (Bloomberg New Economy Forum) के मुख्य अतिथि के रूप में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक विस्तृत और दृष्टिसंपन्न संबोधन दिया। इस उच्चस्तरीय अर्थव्यवतात्मक मंच पर प्रधानमंत्री ने भारत के आर्थिक रूपांतरण, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में देश की बढ़ती भूमिका और नवाचार-आधारित विकास के महत्व पर प्रकाश डाला। इस फोरम में दुनिया भर के अग्रणी कार्यकारी, निवेशक, पत्रकार और नीति निर्माता उपस्थित थे, जिनसे प्रधानमंत्री ने सीधे संवाद साधा।
संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री ने तर्क दिया कि भारत अब केवल एक बड़ा बाजार नहीं है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था का एक मजबूत स्तंभ बन रहा है। उन्होंने 'मेक इन इंडिया' अभियान की सफलता के संदर्भ में बताया कि कैसे देश तेजी से एक विश्व स्तरीय निर्माता बन रहा है। प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, और हरित ऊर्जा जैसे उभरते हुए क्षेत्रों में किए जा रहे निवेश पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि भारत केवल विनिर्माण (manufacturing) में ही नहीं, बल्कि डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के क्षेत्र में भी एक वैश्विक केंद्र के रूप में उभर रहा है।
प्रधानमंत्री ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की चुनौतियों, जैसे भूराजनीतिक तनाव और ऊर्जा संकट, के बीच भारत के प्रस्तावित समाधानों पर भी चर्चा की। उन्होंने 'वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गनाइजेशन' (WTO) में सुधार की अपनी मांगों को दोहराया और देशभक्ति के साथ वैश्विक सहयोग के संतुलन पर बखेड़ा। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का विकास मॉडल लोकतांत्रिक मूल्यों और बाजार-आधारित कदमों का एक अनोखा संगम है, जो अन्य विकासशील देशों के लिए एक प्रेरणास्रोत है।
फोरम के दौरान प्रधानमंत्री ने निवेशकों को आश्वासन देते हुए कहा कि भारतीय सरकार नियमों में पारदर्शिता और निवेश के लिए अनुकूल वातावरण बनाए रखने के प्रति प्रतिबद्ध है। उन्होंने युवा पीढ़ी के कौशल विकास और रोजगार सृजन पर भी बल दिया, जो भारत की demographic dividend (जनसांख्यिकीय फायदा) को सशक्त बनाने के लिए महत्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री ने उल्लेख किया कि भारत की अर्थव्यवस्था अब अधिक विविध और सहजी के साथ-साथ वैश्विक जोखिमों के प्रति भी मजबूत होती जा रही है।
इस बैठक में ब्लूमबर्ग के प्रमुख पत्रकारों और विश्लेषकों द्वारा किए गए प्रश्नों के जवाब में भी प्रधानमंत्री ने विस्तार से भारत की आर्थिक नीतियों की व्याख्या की। उन्होंने राजस्व संग्रह में बढ़ोतरी, बड़ी कंपनियों के लिस्टिंग और शेयर बाजार में निवेशक विश्वास के स्तर पर भी प्रकाश डाला। प्रधानमंत्री का यह संबोधन न केवल भारतीय जनता के लिए एक विश्वास का संदेश था, बल्कि यह वैश्विक व्यवसाय जगत को भी स्पष्ट संकेत देता है कि भारत अगले दशक में वैश्विक अर्थव्यवस्था के केंद्र में बनेगा।
इस फोरम का आयोजन नई दिल्ली में किया गया, जो इस बात की पुष्टि करता है कि भारत अब अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक चर्चाओं का एक प्रमुख केंद्र है। प्रधानमंत्री के इस संबोधन ने देश के भविष्य के आर्थिक सफर की दिशा को स्पष्ट किया है, जिसमें नवाचार, स्थिरता और सहयोग तीन मुख्य स्तंभ बने रहेंगे।