कोरिया दौरे के दौरान श्री सर्बानंद सोनोवाल कोरियाई उद्योग जगत के समक्ष भारत में जहाज निर्माण के अवसरों को प्रस्तुत करेंगे
श्री सर्बानंद सोनोवाल कोरिया दौरे के दौरान भारतीय जहाज निर्माण क्षमताओं और निवेश के अवसरों को कोरियाई उद्योग जगत के समक्ष रखेंगे।
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भारत और कोरिया के बीच द्विपक्षीय व्यापार और औद्योगिक सहयोग को नई दिशा देने के उद्देश्य से, श्री सर्बानंद सोनोवाल का कोरिया दौरा विशेष महत्व का माना जा रहा है। इस महत्वपूर्ण यात्रा के दौरान, श्री सोनोवाल कोरियाई उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के समक्ष भारत में जहाज निर्माण (Shipbuilding) क्षेत्र से जुड़े व्यापक अवसरों को प्रस्तुत करेंगे। यह पहल दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को गहरा करने और समुद्री क्षेत्र में भारत की भूमिका को मजबूत करने की ओर迈 एक बड़ा कदम है।
श्री सर्बानंद सोनोवाल का मानना है कि कोरिया जहाज निर्माण तकनीक और समुद्री इंजीनियरिंग के क्षेत्र में एक अग्रणी देश है, जबकि भारत विश्व का सबसे बड़ा जहाज निर्माण हब बनने की ओर आगे बढ़ रहा है। इस दौरे के मध्यम से उनका लक्ष्य कोरियाई कंपनियों को भारत के जहाज निर्माण उद्योग के विस्तारशील बाजार, आधुनिक पूर्ति केंद्रों (Dry Docks) और सरकारी प्रोत्साहन नीतियों के बारे में विस्तार से अवगत कराना है। वे यह भी उम्मीद रखते हैं कि इस बैठक के जरिए दोनों देशों के बीच जॉइंट वेंटर्स (Joint Ventures) और तकनीकी हस्तांतरण (Technology Transfer) के नए धागे बुने जा सकेंगे।
विशेष रूप से, भारत सरकार द्वारा 'मेक इन इंडिया' और 'निर्माणात्मीय भारत' की नीतियों के तहत जहाज निर्माण क्षेत्र को प्राथमिकता दी जा रही है। कोरियाई कंपनियों के लिए यह एक ऐतिहासिक अवसर है कि वे भारत में अपने निवेश को विविधिकृत करें। श्री सोनोवाल ने स्पष्ट किया है कि भारत की भू-राजनीतिक स्थिति और बढ़ती हुई समुद्री व्यापार गतिविधियां जहाज निर्माण, रखरखाव और मरम्मत (MRO) सेवाओं की मांग को तेजी से बढ़ा रही हैं। कोरियाई उद्योगपतियों को यह संदेश दिया जाएगा कि भारत न केवल एक बड़ा उपभोक्ता बाजार है, बल्कि एक प्रगतिशील निर्माता भविष्य भी है।
इस बैठक में जहाज निर्माण की उन्नत तकनीकों, हरित समुद्री प्रौद्योगिकियों (Green Maritime Technologies) और डिजिटल समुद्री समाधानों पर भी गहन चर्चा का अनुमान है। कोरियाई कंपनियां अपनी अत्याधुनिक डिजाइन और इंजीनियरिंग विशेषज्ञता के लिए प्रसिद्ध हैं, और भारत इन तकनीकों को स्थानीय स्तर पर लागू करके अपनी जहाज निर्माण क्षमता को वैश्विक मानकों तक ले जाना चाहता है। इस सहयोग से न केवल भारत के जहाज निर्माण बंदरगाहों की कार्यक्षमता में वृद्धि होगी, बल्कि लाखों नए रोजगार के सृजन का भी दायरा खुलेगा।
श्री सोनोवाल के इस दौरे से भारत-कोरिया संबंधों को नया आयाम मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। यह यात्रा केवल एक व्यापारिक बैठक नहीं, बल्कि दोनों देशों के बीच रणनीतिक विश्वास और औद्योगिक एकता को मजबूत करने की प्रक्रिया का हिस्सा है। स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने इस घटनाक्रम को भारी इंटरेस्ट के साथ देखा है, क्योंकि यह आगे आने वाले वर्षों में समुद्री क्षेत्र में भारत की वापसी की नींव रख सकता है। कोरियाई उद्योग जगत के साथ इस संवाद से दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं के लिए लाभकारी परिणाम निकलने की संभावनाएं मजबूत हो गई हैं।