राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (एनबीए) ने पहुंच और लाभ साझाकरण व्यवस्था के अंतर्गत 29 राज्य जैव विविधता परिषदों और एक केंद्र शासित प्रदेश जैव विविधता परिषद को 1.19 करोड़ रुपये वितरित किए
राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (एनबीए) ने 29 राज्य जैव विविधता परिषदों और एक केंद्र शासित प्रदेश जैव विविधता परिषद को 1.19 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की है। यह वितरण "पहुंच और लाभ साझाकरण" (Access & Benefit Sharing) योजना के तहत किया गया है, जिसका उद्देश्य जैव विविधता संरक्षण और स्थानीय समुदायों के विकास को सुदृढ़ करना है।
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राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (एनबीए) ने आज घोषणा की कि इस वर्ष के लिए “पहुंच और लाभ साझाकरण” (Access & Benefit Sharing) व्यवस्था के अंतर्गत 29 राज्य जैव विविधता परिषदों और एक केंद्र शासित प्रदेश जैव विविधता परिषद को कुल 1.19 करोड़ रुपये वितरित किए गए हैं। यह राशि जैव विविधता के संरक्षण, उसके सतत उपयोग और उससे उत्पन्न लाभों को स्थानीय समुदायों के बीच न्यायसंगत रूप से बाँटने के उद्देश्य से दी गई है।
एनबीए के प्रमुख, डॉ. आर. के. गुप्त ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि यह वित्तीय सहायता “जैव विविधता संरक्षण के क्षेत्र में राज्यों के प्रयासों को मान्यता देने और उनके कार्यान्वयन को प्रोत्साहित करने” के लिए है। उन्होंने कहा, “इस वर्ष की यह फंडिंग हमें यह दिखाती है कि केंद्रीय सरकार जैव विविधता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को गंभीरता से ले रही है।”
जैव विविधता परिषदें, जो राज्य और केंद्र शासित प्रदेश स्तर पर कार्य करती हैं, वे स्थानीय स्तर पर जैव विविधता से संबंधित नीतियों, योजनाओं और कार्यक्रमों का निर्माण करती हैं। एनबीए के अनुसार, इन परिषदों को मिलने वाली राशि का उपयोग वे अपनी-अपनी योजनाओं में निवेश कर सकती हैं, जैसे कि पारिस्थितिक तंत्रों की पुनर्स्थापना, स्थानीय लोगों के लिए शिक्षा और प्रशिक्षण कार्यक्रम, और जैव विविधता के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए विभिन्न पहल।
वितरित राशि का विवरण निम्नलिखित है:
- 29 राज्य जैव विविधता परिषदों को कुल 1.12 करोड़ रुपये। - 1 केंद्र शासित प्रदेश जैव विविधता परिषद को 7 लाख रुपये।
एनबीए के अनुसार, यह फंडिंग “पहुंच और लाभ साझाकरण” के ढाँचे के तहत दी जा रही है, जिसमें जैव विविधता के स्रोतों तक पहुँच और उससे उत्पन्न होने वाले लाभों का साझा करना शामिल है। यह व्यवस्था 2002 के जैव विविधता अधिनियम (Biological Diversity Act) के तहत स्थापित की गई थी।
एनबीए के कार्यकारी निदेशक, प्रिया शर्मा ने बताया कि “हमने इस वर्ष की फंडिंग को राज्यों के बीच समान रूप से बाँटने के लिए एक स्पष्ट मानदंड तय किया है। इस मानदंड के अंतर्गत, प्रत्येक राज्य को उनकी जैव विविधता की समृद्धि, संरक्षण के प्रयास और स्थानीय समुदायों के लाभों के आधार पर राशि आवंटित की गई है।”
कई राज्यों ने पहले ही इस फंडिंग का उपयोग अपने संरक्षण कार्यों में किया है। उदाहरण के लिए, तमिलनाडु में, इस वर्ष के फंड से एक नया “जैव विविधता शिक्षा केंद्र” खोला गया, जहाँ स्थानीय स्कूलों के छात्रों को जैव विविधता के महत्व के बारे में शिक्षित किया जा रहा है।
इसके अलावा, महाराष्ट्र की जैव विविधता परिषद ने इस राशि का उपयोग “सतत कृषि प्रथाओं” के प्रचार-प्रसार के लिए किया है। उन्होंने बताया कि “इस वर्ष के फंड के कारण, हम 10,000 से अधिक किसानों को जैविक खेती के तरीकों के बारे में प्रशिक्षित कर सके हैं।”
एनबीए के अनुसार, “पहुंच और लाभ साझाकरण” के तहत दी गई इस फंडिंग का एक हिस्सा भविष्य के शोध और विकास कार्यों के लिए भी earmarked किया गया है। इससे वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं को जैव विविधता के नए पहलुओं पर अध्ययन करने में सहायता मिलेगी।
अंत में, एनबीए के प्रवक्ता, अमित कुमार ने कहा, “हम इस वर्ष की फंडिंग से यह आशा करते हैं कि राज्यों के बीच जैव विविधता संरक्षण के प्रयास और अधिक समन्वित और प्रभावी बनेंगे। हम सभी राज्यों से अनुरोध करते हैं कि वे इस फंड का उपयोग अपने-अपने क्षेत्र में जैव विविधता के संरक्षण और विकास के लिए करें।”
इस प्रकार, 1.19 करोड़ रुपये की यह सहायता राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण के प्रयासों को सुदृढ़ करती है और भारत के जैव विविधता संरक्षण के लक्ष्यों को प्राप्त करने में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।