प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार भारत को एक ऐसा राष्ट्र बनाने के लिए प्रतिबद्ध है, जो समृद्धि, ज्ञान एवं शक्ति के साथ-साथ वैश्विक शांति और मानवता के कल्याण के प्रति भी समर्पित हो: रक्षा मंत्री
रक्षा मंत्री ने संसद में बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार का लक्ष्य भारत को समृद्धि, ज्ञान और शक्ति से युक्त एक वैश्विक शक्ति बनाना है, जो अंतर्राष्ट्रीय शांति और मानवता के कल्याण के प्रति समर्पित रहे।
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भारतीय संसद के दोनों सदनों के समक्ष आज एक महत्वपूर्ण प्रस्तुति करते हुए रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि वर्तमान सरकार का दृष्टिकोण केवल सुरक्षात्मक नहीं, बल्कि रचनात्मक और वैश्विक दायित्वों को समेटे हुए है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दृढ़ नेतृत्व में भारत सरकार एक ऐसे राष्ट्र के निर्माण के लिए पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है, जो न केवल आंतरिक समृद्धि और आधुनिक ज्ञान व्यवस्था पर कब्जा करेगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर शक्तिशाली भी होगा। मंत्रियों के अनुसार, इस शक्ति का प्रयोग केवल स्वार्थ के लिए नहीं, बल्कि वैश्विक शांति के संरक्षण और मानवता के समग्र कल्याण के प्रति समर्पित रहने के उद्देश्य से किया जाएगा।
रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में वर्तमान जटिल वैश्विक परिदृश्य के संदर्भ में भारत की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दशकों में भारत ने ऐतिहासिक प्रगति की है, जिसके परिणामस्वरूप देश अब एक ऐसा मंच है जहाँ तकनीकी चतुराई, आर्थिक मजबूती और सैन्य क्षमता का संगम देखा जा सकता है। इस प्रकार के विकास का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भारत अंतर्राष्ट्रीय मंच पर न केवल एक प्रेक्षक, बल्कि एक निर्णायक और निर्णायक शक्ति के रूप में उभरे। उन्होंने तर्क दिया कि जब एक राष्ट्र अपनी आंतरिक चुनौतियों को हल करके समृद्धि और ज्ञान के शिखर पर पहुँचता है, तो उसकी वैश्विक जिम्मेदारियाँ भी स्वतः ही बढ़ जाती हैं।
संसदीय बैठक के दौरान रक्षा मंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि 'वैश्विक शांति' का अर्थ केवल युद्ध की अनुपस्थिति नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा वातावरण है जहाँ सहयोग, संवाद और सामुदायिक सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाती है। भारत इसी परिप्रेक्ष्य में अपनी नीतियों को ढाल रहा है। मंत्रियों ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार का यह संकल्प केवल शब्दों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह रणनीतिक योजनाओं, द्विपक्षीय संबंधों और बहुपक्षीय मंचों पर भारत के सक्रिय भागीदारी में दिखाई दे रहा है।
सूत्रों के अनुसार, इस भाषण का प्रमुख उद्देश्य यह संदेश देना था कि भारत की शक्ति का विस्तार किसी भी अन्य राष्ट्र के लिए खतरा नहीं, बल्कि क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता के लिए एक सकारात्मक बल है। रक्षा मंत्री ने यह भी जोर दिया कि ज्ञान आधारित आधुनिकीकरण और तकनीकी आत्मनिर्भरता इस प्रक्रिया की नींव है, जिससे भारत अपनी सुरक्षा मामलों में पूरी तरह से स्वतंत्र हो रहा है। यह दृष्टिकोण प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा प्रस्तावित 'विकसित भारत' के सपने की व्याख्या करता है, जहाँ राष्ट्रीय शक्ति और मानवीय कल्याण एक-दूसरे के पूरक हैं।
संसद के सदस्यों ने इस घोषणा पर विभिन्न प्रतिक्रियाओं के साथ चर्चा की, जहाँ कुछ ने इसे भारत की बढ़ती अंतर्राष्ट्रीय छवि की पुष्टि माना, वहीं अन्य ने इसमें उल्लेखित वैश्विक दायित्वों के व्यावहारिक पहलूओं पर प्रश्न उठाए। हालांकि, रक्षा मंत्री ने इस पर उत्तर देते हुए कहा कि सरकार प्रत्येक कदम में पारदर्शिता और जिम्मेदार भावना को बनाए रखेगी। इस प्रकार, आज का संसदीय सत्र भारत के भविष्य के रणनीतिक मार्गदर्शन को स्पष्ट करने का एक महत्वपूर्ण पड़ाव बन गया, जहाँ समृद्धि, ज्ञान, शक्ति और मानवता के कल्याण को एक ही बाँस के चारों फलकों के रूप में प्रस्तुत किया गया।