प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने महर्षि वाल्मीकि जयंती के अवसर पर शुभकामनाएं दीं
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने महर्षि वाल्मीकि जयंती के शुभ अवसर पर देशवासियों को बधाई दी और उनके साहित्यिक योगदान, विशेषकर रामायण के रचयिता होने की वजह से उनकी महानता पर प्रकाश डाला।
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सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 को, भारतीय संस्कृति और साहित्य की एक अमर हस्ति महर्षि वाल्मीकि की जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं प्रस्तुत कीं। मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में महर्षि वाल्मीकि को न केवल एक कवि के रूप में, बल्कि भारतीय सभ्यता के स्तम्भ स्थापित करने वाले एक महान विचारी और दार्शनिक के तौर पर परिचय दिया। प्रधानमंत्री ने उल्लेख किया कि महर्षि वाल्मीकि का जीवन और उनकी रचनाएं भारतीय भावना प्रणाली के सबसे गहन और प्रेरणादायक पक्षों को दर्शाती हैं।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपनी शुभकामनाओं में विशेष तौर पर 'महाकाव्य रामायण' के रचयिता के रूप में महर्षि वाल्मीकि का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि रामायण केवल एक काल्पनिक कथा नहीं है, बल्कि यह धर्म, नैतिकता, कर्तव्य और मानवता के मूल्यों का एक समग्र संग्रह है। महर्षि वाल्मीकि की इस महान रचना ने सदियों से भारतीय लोगों के मन और आत्मा में अपनी गहराई से जगह बनाई है और यह विश्व साहित्य में भी एक अद्वितीय स्थान प्राप्त कर चुकी है। प्रधानमंत्री ने ध्यान आकर्षित किया कि वाल्मीकि रामायण ने भारतीय संस्कृति को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई है, जिससे यह अब दुनिया भर के लोगों पढ़ी और समझी जाने वाली एक साहित्यिक धरोहर बन गई है।
इस मौके पर प्रधानमंत्री ने महर्षि वाल्मीकि के जीवन के उन पक्षों पर भी प्रकाश डाला, जो विनम्रता और संयम के प्रतीक हैं। उन्होंने बताया कि महर्षि का जीवन एक कठोर परिश्रम और आध्यात्मिक साधना का परिणाम था, जिसने उन्हें साहित्य के क्षेत्र में अमर कर दिया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि की विरासत को याद रखना और उसका सम्मान करना भारतीय संस्कृति की गौरवशाली परंपराओं को जीवित रखने का एक आवश्यक पहलू है।
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश के अंत में देशवासियों से अपील की कि वे यह अवसर सार्थक ढंग से मनाएं और महर्षि वाल्मीकि के जीवन और कार्यों से प्रेरणा लें। उन्होंने ध्यान दिलाया कि भारतीय संस्कृति में साहित्य और कला का महत्व कितना गहरा है और महर्षि वाल्मीकि इस संस्कृति के सबसे चमकदार तारा हैं। प्रधानमंत्री ने आशा जताई कि आने वाली पीढ़ियां भी इस मूल्यवान साहित्यिक धरोहर को समझें और अपने जीवन में इससे प्रेरित हों। इस प्रकार, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा दी गई ये शुभकामनाएं न केवल एक साहित्यिक उत्सव का सम्मान करती हैं, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक पहचान की गौरवशाली परंपराओं को एक नई ऊर्जा प्रदान करती हैं।