प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने महिला और बाल विकास पर राष्ट्रीय विभागीय शिखर सम्मेलन के समापन सत्र की अध्यक्षता की
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने १० अक्टूबर २०२६ को महिला और बाल विकास पर राष्ट्रीय विभागीय शिखर सम्मेलन के समापन सत्र की अध्यक्षता की, जिसमें देश के महिला और बाल कल्याण संबंधी विकास कार्यों की समीक्षा और भविष्य की रणनीति पर चर्चा की गई।
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शनिवार, १० अक्टूबर २०२६ को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने देश के महिला और बाल विकास के क्षेत्र में हो रहे प्रगति कार्यों की समीक्षा के लिए आयोजित राष्ट्रीय विभागीय शिखर सम्मेलन के समापन सत्र की अध्यक्षता की। यह महत्वपूर्ण बैठक उस समय हुई जब भारत अंतर्गट विकास लक्ष्यों की ओर बढ़ रहा है और महिला सशक्तिकरण तथा बाल कल्याण को राष्ट्रीय प्राथमिकता के रूप में देख रहा है।
प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर मुख्य मंत्रालय की ओर से किए गए प्रस्तुतियों और विभिन्न मंत्रालयों द्वारा दी गई रिपोर्ट्स की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक विकास को सुनिश्चित करना ही राष्ट्र निर्माण की नींव है। बैठक के दौरान, प्रधानमंत्री ने विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन की स्थिति को गहनता से देखते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे कार्यप्रणाली में निष्ठा और दक्षता का पूर्ण पालन करें ताकि योजनाओं के लाभ सीधे तौर पर समाज की अंतिम छोर की महिलाओं और बच्चों तक पहुंच सकें।
समापन सत्र में, महिला और बाल विकास मंत्रालय के उच्च पदस्त अधिकारियों ने देशभर में कार्यान्वित की गई योजनाओं का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया। इसमें महिलाओं के लिए स्वरोजगार के अवसर, शिक्षा में विविधता, स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और बाल विकास के लिए किए गए विशेष प्रयासों को शामिल किया गया। प्रधानमंत्री ने तारीफ की कि पिछले कुछ वर्षों में महिलाओं के प्रतिभाग दर, खेलों, राजनीति और उद्योग जगत में लगातार वृद्धि हुई है, जो देश के सामाजिक संतुलन के लिए एक सकारात्मक संकेत है।
मोदी जी ने यह भी उल्लेख किया कि डिजिटल भारत और आत्मनिर्भर भारत के ज़माने में महिलाओं को नई तकनीक का लाभ उठाने की उचित प्रशिक्षण और अवसर प्रदान करना आवश्यक है। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों से अपील की कि वे सहयोग की भावना से काम करें ताकि बाल विवाह, लिंग भेदभाव और शिक्षा में असमानता जैसे पुराने समाजिक रोगों को खत्म किया जा सके। बैठक के अंत में, प्रधानमंत्री ने सभी संबंधित अधिकारियों को समर्थन दिया और कहा कि सरकार महिलाओं और बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए कभी पीछे नहीं हटेगी।
यह शिखर सम्मेलन न केवल एक सरकारी बैठक थी, बल्कि यह देश के भविष्य की दिशा तय करने वाला एक महत्वपूर्ण मोड़ प्रस्तुत करता है। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई इस चर्चा ने स्पष्ट किया है कि भारत सरकार महिलाओं को केवल एक लाभार्थी की भूमिका में नहीं, बल्कि विकास की प्रमुख अभियंता के रूप में देख रही है। १० अक्टूबर २०२६ को हुई यह बैठक आने वाले वर्षों में महिला और बाल विकास नीतियों के क्रियान्वयन के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करने में सहायक होगी।