प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने अपने 'मन की बात' कार्यक्रम में खादी एवं ग्रामोद्योग क्षेत्र की उपलब्धियों को रेखांकित कर कारीगरों का मनोबल बढ़ाया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'मन की बात' में खादी और ग्रामोद्योग क्षेत्र की प्रगति का विवरण दिया। उन्होंने देश के कारीगरों और कुटीर उद्योगों को सराहना करते हुए उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरणा दी।
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सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 को, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने अपने लोकप्रिय 'मन की बात' कार्यक्रम के जरिए देशवासियों से सीधे संवाद किया। इस बार के संदेश का केंद्र बिंदु खादी एवं ग्रामोद्योग क्षेत्र की उल्लेखनीय उपलब्धियां और देश के कारीगरों का अपरिहार्य योगदान रहा। प्रधानमंत्री ने इस मौके पर खादी के विकास और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सशक्तिकरण को लेकर एक विस्तृत चित्र प्रस्तुत किया, जिसमें उन्होंने न केवल पिछले कुछ वर्षों में हुए बदलावों को रेखांकित किया, बल्कि आने वाले समय के संभावित अवसरों पर भी प्रकाश डाला।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बताया कि खादी अब केवल एक वस्त्र नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और आत्मनिर्भरता का प्रतीक बन गई है। उन्होंने उल्लेख किया कि सरकार की कड़ी मेहनत और कारीगरों के ईमानदार प्रयासों के कारण खादी उत्पादन में एक नया स्तर देखने को मिल रहा है। उन्होंने विशेष रूप से ग्रामोद्योग क्षेत्र को धन्यवाद दिया, क्योंकि इस क्षेत्र में काम करने वाले लाखों कारीगर, बुनकर और हस्तशिल्प विशेषज्ञ देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। उन्होंने कहा कि इन कारीगरों की उंगलियों की मेहनत ही है जो देश को विश्व स्तर पर पहचान दिला रही है।
इस अपील में, प्रधानमंत्री ने कारीगरों के मनोबल को और ऊंचा उठाने का संकेत दिया। उन्होंने कहा कि हर कारीगर एक नायक है, जो गांवों में रोजगार पैदा कर रहा है और महिलाओं के सशक्तिकरण में अहम भूमिका निभा रहा है। उन्होंने खादी के डिज़ाइन और उपयोगिता में हुए सुधारों का भी जिक्र किया, जिससे यह उत्पाद अब आधुनिक जीवनशैली के साथ भी तालमेल बिठा पा रहा है। उन्होंने बताया कि सरकार ने खादी के डिजिटल बाजार और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए कई नई योजनाएं शुरू की हैं, जिससे कारीगरों तक तकनीक और बाजार का सीधा पहुंच मिल रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आगे कहा कि ग्रामोद्योग क्षेत्र में नवीनतम तकनीकों का उपयोग करना अब एक आवश्यकता है। उन्होंने कारीगरों से अपील की कि वे नई तकनीकों और डिज़ाइन ट्रेंड्स को अपनाएं, ताकि उनके उत्पाद ग्राहकों के बीच और भी अधिक लोकप्रिय हो सकें। उन्होंने यह भी पुष्टि की कि सरकार इस संबंध में हर संभव सहायता प्रदान करेगी। यह संदेश उन सभी कारीगरों के लिए था, जो कठिन परिश्रम के बावजूद अपनी कला को जीवित रखने के लिए संघर्षरत हैं।
अंत में, प्रधानमंत्री ने देशवासियों से अपील की कि वे खादी और ग्रामोद्योग उत्पादों को खरीदने को अपना दायित्व समझें। उन्होंने कहा कि हर खरीदारी कारीगर की जीत है। यह 'मन की बात' न केवल एक राजनीतिक संदेश था, बल्कि यह देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था और हस्तशिल्प परंपरा को बचाने और बढ़ाने के लिए एक मजबूत संकल्प का प्रतीक भी था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस संदेश ने खादी कारीगरों को नई ऊर्जा प्रदान की है, वे अब आत्मविश्वास के साथ अपने कारखानों और कुटीरों में काम करने जा रहे हैं।