प्रधानमंत्री ने हाल ही में एक संस्कृत सुभाषित साझा किया, जिसमें प्रकृति की रक्षा और पोषण के माध्यम से समाज के सभी वर्गों के कल्याण और समृद्धि को सुनिश्चित करने की अहमियत को रेखांकित किया गया है। यह संदेश पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक आवश्यकताओं के बीच जुड़ाव को दर्शाता है।


