भारत की राष्ट्रपति ने 65वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी के चयनित कलाकारों को ललित कला अकादमी पुरस्कार प्रदान किए
भारत की राष्ट्रपति ने 65वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी में चयनित कलाकारों को ललित कला अकादमी पुरस्कार प्रदान किए।
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राष्ट्रपति भवन के लाल किले के उपलब्धि सभागार में आज एक भव्य समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें भारत की राष्ट्रपति ने ललित कला के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले कलाकारों को सम्मानित किया। इस अवसर पर, 65वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी में अपने चयनित कार्यों के लिए ललित कला अकादमी पुरस्कार प्राप्त करने वाले कलाकारों को सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार न केवल इन कलाकारों के लिए एक व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि भारतीय ललित कला परिदृश्य की विविधता और गहराई को दर्शाता है।
समारोह में उपस्थित उच्च अधिकारियों और कला समुदाय के प्रतिनिधियों ने कलाकारों की प्रेरणादायक यात्रा पर प्रकाश डाला। राष्ट्रपति ने अपने सम्बोधन में कहा कि कला समाज के मूल स्तंभों में से एक है और यह राष्ट्र की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत बनाती है। उन्होंने 65वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी में चयनित होने वाले कलाकारों को बधाई देते हुए कहा कि उनकी रचनात्मकता और दृढ़ता ने भारतीय कला को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है।
ललित कला अकादमी पुरस्कार को देश में ललित कला के क्षेत्र में सर्वोच्च मान्यताओं में से एक माना जाता है। इस बार के चयन में विभिन्न माध्यमों—तश्ती, मूर्तिकला, शिल्प, और डिजिटल कला—में काम करने वाले कलाकारों का समावेश किया गया, जो यह दर्शाता है कि आधुनिक कला के स्वरूप के साथ-साथ परंपरागत कलाओं को भी समान महत्व दिया जा रहा है। कलाकारों ने अपने भाषणों में राष्ट्रपति के इस सम्मान के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया और कहा कि यह पुरस्कार उन्हें आगे भी बेहतर और असाधारण कलात्मक कार्यों को प्रस्तुत करने के लिए प्रेरित करेगा।
इस कार्यक्रम को और भी विशेष बनाते हुए, युवा कलाकारों के लिए भी विशेष सत्र का आयोजन किया गया, जहाँ अनुभवी कलाकारों ने उन्हें अपने अनुभव साझा किए और उन्हें कला की दुनिया में आगे बढ़ने के लिए मार्गदर्शन दिया। यह पहल युवा पीढ़ी में कला के प्रति रुचि को बढ़ावा देने और उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करने का एक महत्वपूर्ण कदम है।
समारोह के अंत में, सभी सम्मानित कलाकारों को प्रतीकात्मक रूप से पुरस्कार प्रदान किए गए। यह दिन न केवल विजेताओं के लिए गर्व का क्षण था, बल्कि पूरे कला समुदाय के लिए एक साथ आने और भारतीय ललित कला की भविष्य की संभावनाओं पर चर्चा करने का अवसर भी रहा। आज की तारीख, 21 अक्टूबर 2026 को, यह समारोह भारतीय सांस्कृतिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण पृष्ठ के रूप में दर्ज हो गया है, जो कला के प्रति देश की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।