भारत की राष्ट्रपति ने डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की जयंती पर पुष्पांजलि अर्पित की
भारत की राष्ट्रपति ने 15 अक्टूबर, 2026 को डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की जयंती के उपलक्ष्य में राष्ट्रपति भवन में पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। राष्ट्रपति ने 'मिसाइल मैन' के रूप में उनके वैज्ञानिक योगदान और सरल जीवनशैली की सराहना की।
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नई दिल्ली, 15 अक्टूबर 2026 – आज, 15 अक्टूबर को, भारत की राष्ट्रपति ने देश के प्रियतम पुत्र और पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की जयंती को समर्पित किया। राष्ट्रपति भवन के मुख्य सभागार में आयोजित एक सरल लेकिन गरिमापूर्ण समारोह के दौरान, राष्ट्रपति ने डॉ. कलाम की प्रतीमा के समक्ष पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें गहरी श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर, राष्ट्रपति ने डॉ. अब्दुल कलाम के जीवन, विचारों और देश के लिए किए गए अतुलनीय योगदान पर प्रकाश डाला।
राष्ट्रपति ने अपने संदेश में कहा कि डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम केवल एक वैज्ञानिक नहीं, बल्कि एक संकल्प और आदर्शों के प्रतीक थे। उन्होंने डॉ. कलाम को 'मिसाइल मैन' के रूप में याद करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में भारत ने रॉकेट और मिसाइल तकनीक में विश्व स्तर पर अपनी जगह बनाई, जिससे देश की रक्षा क्षमता और वैज्ञानिक प्रतिष्ठा को नई ऊंचाई हासिल हुई। राष्ट्रपति ने विशेष रूप से उनका 'विजन 2020' का उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने भारत को विकसित देशों के समकक्ष बनाने का सपना देखा था।
समारोह में, डॉ. कलाम की सरल जीवनशैली और युवाओं के प्रति उनकी असीमित रुचि पर भी चर्चा की गई। राष्ट्रपति ने बताया कि डॉ. कलाम हमेशा युवाओं के बीच पहुंचकर उन्हें प्रेरित करते थे और उन्हें अपने सपनों को बड़ा सोचने के लिए प्रेरित करते थे। उन्होंने कहा कि आज भी डॉ. कलाम के विचार युवा पीढ़ी के लिए एक दिशा-निर्देशक हैं। 'डॉ. कलाम का सपना' आज भी देश के विकास का आधार बना हुआ है।
इस मौके पर, राष्ट्रपति ने सभी नागरिकों से अपील की कि वे डॉ. अब्दुल कलाम के जीवन से प्रेरणा लें और अपने-अपने क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करें। उन्होंने कहा कि डॉ. कलाम ने साबित किया कि कड़ी मेहनत, ईमानदारी और देशभक्ति के जरिए किसी भी व्यक्ति के लिए असंभव, संभव हो सकता है। डॉ. कलाम का आदर्श जीवन और व्यावहारिक दृष्टिकोण आज भी भारतीय समाज के लिए एक प्रेरणास्रोत बना हुआ है।
समारोह के समापन पर, राष्ट्रपति ने डॉ. अब्दुल कलाम की आत्मा को शान्ति की कामना की और उनके परिवार को संवेदनाएं प्रकट कीं। इस अवसर पर देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए विद्वान, युवा प्रतिनिधि और सरकारी अधिकारियों ने भी डॉ. कलाम को याद किया। सभी ने एक स्वर में कहा कि डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की विरासत सदा चलीगी और उनका योगदान भारतीय इतिहास में सुनहरे अक्षरों में लिखा जाएगा। आज पूरे देश में विद्यालयों और संस्थाओं में विशेष कार्यक्रमों के जरिए उनकी जयंती मनाई जा रही है, जहां युवाओं से उनका जीवन-चरित्र और विचारों पर चर्चा की जा रही है।