12वें BRICS संसदीय मंच, 2026 में माननीय लोक सभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला के संबोधन का मूल पाठ
माननीय लोक सभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला ने 12वें BRICS संसदीय मंच 2026 में संबोधन देते हुए बहुपक्षीयवाद, विकासशील देशों के अधिकारों और वैश्विक शांति की रक्षा के लिए भारत के दृढ़ संकल्प को रेखांकित किया।
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वैश्विक राजनीतिक परिदृश्य में भारत की कूटनीतिक दृढ़ता और संसदीय लोकतांत्रिक मूल्यों की साझा पहचान को रेखांकित करते हुए, माननीय लोक सभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला ने हाल ही में आयोजित 12वें BRICS संसदीय मंच 2026 में अपना महत्वपूर्ण संबोधन प्रस्तुत किया। यह मंच न केवल BRICS देशों के संसदियों के बीच संवाद का एक समर्पित मंच है, बल्कि यह वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिए एकजुटता के संकेत के रूप में भी माना जाता है।
अपने संबोधन में, अध्यक्ष श्री बिरला ने BRICS समूह के विस्तार और उसकी बढ़ती आर्थिक एवं राजनीतिक प्रभावशक्ति पर जोर दिया। उन्होंने उल्लेख किया कि BRICS अब केवल एक आर्थिक ब्लॉक नहीं रहा है, बल्कि यह वैकल्पिक वैश्विक शासन संरचना की ओर बढ़ते हुए एक महत्वपूर्ण स्तंभ बन चुका है। विकासशील दुनिया की आवाज़ को वैश्विक मंचों पर प्रबल बनाने के लिए संसदों की भूमिका अत्यंत प्रभावी हो सकती है, यह दृष्टिकोण उनका मुख्य संदेश था।
श्री बिरला ने विशेष रूप से बहुपक्षीयवाद (Multilateralism) के महत्व पर बल दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि आज के समय में द्विपक्षीय गठबंधन और क्षेत्रीय तनावों के बीच, संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की प्रामाणिकता की रक्षा करना अत्यावश्यक है। उन्होंने कहा कि BRICS देशों के संसदों को मिलकर ऐसे प्रस्तावों को आगे बढ़ाना चाहिए, जो ग्लोबल साउथ (विकासशील देशों) के हितों की रक्षा करें और वैश्विक मामलों के निर्णय लेने में इन देशों को समान अधिकार दिलाएं।
संवाद के दौरान, अध्यक्ष बिरला ने परस्पर सम्मान, अंतरराष्ट्रीय कानून के पालन और शांतिपूर्ण सहअस्तित्व के सिद्धांतों को अखंडित रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि विवादों के समाधान के लिए संवाद ही एकमात्र मार्ग है, न कि बल का प्रयोग। इस संदर्भ में, उन्होंने BRICS के भीतर विभिन्न क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला, जिसमें जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा सुरक्षा और डिजिटल अर्थव्यवस्था शामिल हैं।
भारत के संसदीय लोकतंत्र की मजबूत नींव का उद्धरण देते हुए, उन्होंने कहा कि लोकतंत्र ही लोगों की इच्छाओं को संस्थागत करने का सर्वोत्तम माध्यम है। BRICS संसदीय मंच इस बात का प्रमाण है कि विभिन्न राजनीतिक व्यवस्थाओं वाले देश भी आम सहमति और विकास के उद्देश्य से एक साथ काम कर सकते हैं।
अंत में, श्री ओम बिरला ने सभी BRICS देशों के संसदियों से आह्वान किया कि वे अपने-अपने देशों में जनता की आवाज़ को वैश्विक नीति निर्माण में शामिल करें। उन्होंने आशा व्यक्त की कि अगले वर्ष आयोजित होने वाले 13वें मंच तक, BRICS संसदीय मंच एक और मजबूत और प्रभावशाली संस्था के रूप में उभरेगा। यह बैठक 2026 के राजनीतिक और आर्थिक अर्थव्यवस्था के लिए एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकती है, जहाँ भारत अपनी नेतृत्व भूमिका को और मजबूत करने के प्रयासों में जुटा है।