पुस्तकें जीवन को बदलने और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का सशक्त माध्यम हैं: लोक सभा अध्यक्ष
लोक सभा अध्यक्ष ने पुस्तकों को व्यक्तिगत विकास और सामाजिक सुधार के लिए एक अत्यंत शक्तिशाली उपकरण बताया है।
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आधुनिक युग के शोर-शराबे और तकनीकी विकास के बावजूद, ज्ञान की प्राचीन और अमूल्य भूमिका को दोहराते हुए लोक सभा अध्यक्ष ने एक प्रेरणादायक बात कही है कि पुस्तकें जीवन को मूलभूत स्तर पर बदलने और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का सबसे प्रभावी और सशक्त माध्यम हैं। इस महत्वपूर्ण संदर्भ में, अध्यक्ष ने पढ़ाई-लिखाई और साहित्य के प्रति लोगों के रवये पर प्रकाश डाला, जहां उन्होंने स्पष्ट रूप से सुझाव दिया कि प्रत्येक व्यक्ति का दैनिक जीवन पुस्तकों के साथ जुड़ा होना चाहिए। उनका मानना था कि किताबें केवल शब्दों और वाक्यों का संग्रह नहीं हैं, बल्कि ये मानव चेतना को जाग्रत करने, विचारों को विस्तार देने और आत्मा को सान्त्वना प्रदान करने के लिए एक जीवंत माध्यम है।
लोक सभा अध्यक्ष ने अपनी बात को और गहरा करते हुए कहा कि जब तक हम पढ़ते हैं, तब तक हमारी सोच की क्षमता बढ़ती है और हम दुनिया के प्रति अधिक सहिष्णु और समझदार बन पाते हैं। उन्होंने तर्क दिया कि यदि एक समाज में पुस्तक पढ़ने की संस्कृति मजबूत होती है, तो वहां आत्मविश्वास, अनुशासन और नैतिक मूल्यों की एक ठोस नींव स्थापित होती है। यह सकारात्मक परिवर्तन न केवल व्यक्तिगत स्तर पर ही सीमित रहता है, बल्कि यह पूरे सामाजिक ढांचे को प्रभावित करता है, जिससे प्रगति की राह आसान हो जाती है। अध्यक्ष ने यह भी उल्लेख किया कि पुस्तकें हमें अतीत की गलतियों से सीखने और भविष्य के लिए बेहतर योजनाएं बनाने में सहायक साबित होती हैं।
आज के समय में, जब डिजिटल माध्यमों की उपलब्धता अत्यधिक है, ऐसे में शांत बैठकर एक किताब के पन्ने पलटना एक बेहद आवश्यक आध्यात्मिक और मानसिक अभ्यास बन गया है। लोक सभा अध्यक्ष ने जनता से अपील की कि वे खाली समय का सदुपयोग करें और नियमित आधार पर पढ़ाई करें, चाहे वह कोई भी विषय हो। उनका कहना था कि दुनिया की किसी भी समस्या का समाधान या जीवन की किसी भी चुनौती का सामना करने का उपाय अंततः ज्ञान और विवेक में ही निहित है, जो कि पुस्तकों के माध्यम से ही प्राप्त होता है।
अध्यक्ष ने यह भी बताना महसूस किया कि शिक्षा और साहित्य का प्रसार करना एक सामूहिक उत्तरदायित्व है। जब समाज के हर तबके के लोग पुस्तकों से जुड़ते हैं, तो वहां अंधविश्वास, भ्रम और नकारात्मक सोच की जगह तर्क और प्रगतिशील विचारों को मिलता है। इस प्रकार, पुस्तकें एक सेतु की भूमिका निभाती हैं जो व्यक्ति को समाज से, और समाज को प्रगति से जोड़ती हैं। लोक सभा अध्यक्ष की यह टिप्पणी इस बात का पुख्ता सबूत है कि ज्ञान को बढ़ावा देना ही राष्ट्र निर्माण और सामाजिक समृद्धि की कुंजी है, और इसके लिए पुस्तकें हमारे सबसे भरोसेमंद साथी हैं।