डॉ. एल. मुरुगन ने युवाओं से 2047 तक विकसित भारत यात्रा में देश का नेतृत्व करने का आह्वान किया
डॉ. एल. मुरुगन ने हालिया एक सभा में युवा पीढ़ी को 2047 तक विकसित भारत की यात्रा में अग्रणी भूमिका निभाने का आह्वान किया, जिसमें उन्होंने राष्ट्रीय विकास की चुनौतियों और अवसरों पर गहन चर्चा की।
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गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026 को आयोजित एक विशेष सभा के अवसर पर, प्रतिष्ठित विचारक डॉ. एल. मुरुगन ने देश के युवाओं की ओर से एक संवेदनशील और दूरदर्शी संदेश रखा। उन्होंने युवा पीढ़ी से अपील की कि वे आने वाले दशकों में भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने की यात्रा में केवल प्रेक्षक न बनें, बल्कि इस प्रक्रिया की कमान संभालें और देश का नेतृत्व करें। डॉ. मुरुगन ने तर्क दिया कि 2047 तक भारत के वैश्विक मंच पर एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभरने के लिए, वर्तमान युवाओं को ही वह बुनियादी ढांचा और आधुनिक विचारधारा प्रदान करनी होगी जो इस अवधारणा को हक़ीक़त में बदले।
सभा में हाज़िर दर्शकों को संबोधित करते हुए, डॉ. एल. मुरुगन ने वर्तमान परिस्थितियों का विश्लेषण करते हुए कहा कि 2047 का भारत वह भारत नहीं होगा जो आज हम देख रहे हैं। यह एक ऐसा भारत होगा जिसकी अर्थव्यवस्था विश्व में शीर्ष पर होगी, जिसकी तकनीकी क्षमताएं अत्यंत उन्नत होंगी और जिसके नागरिकों का जीवन स्तर वैश्विक मानकों के अनुरूप होगा। इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए, उन्होंने युवाओं से कहा कि उन्हें परंपरागत सोच के पुरजालों से मुक्त होकर, नवीन प्रौद्योगिकियों, बरकरार विकास (sustainable development) और सामाजिक न्याय पर केंद्रित कार्यपद्धति अपनावें।
डॉ. मुरुगन ने जोर देकर कहा कि युवाओं के हाथों में ही भविष्य का रंग तय करने की शक्ति है। उन्होंने युवाओं से कहा कि वे अपनी निपुणता, प्रौद्योगिकी और रचनात्मकता का उपयोग देश की चुनौतियों को हल करने के लिए करें, चाहे वह कृषि क्षेत्र हो, शिक्षा हो या स्वास्थ्य सेवाएं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि 2047 तक के विकास के मार्ग पर, युवाओं को न केवल आर्थिक समृद्धि की ओर बढ़ना होगा, बल्कि सामाजिक संवेदनशीलता और पर्यावरणीय सततता को भी अपनी प्राथमिकताओं में शामिल करना होगा।
सभा के दौरान, डॉ. मुरुगन ने युवाओं की ऊर्जा और उत्साह को प्रशंसित किया, साथ ही उन्हें चेतावनी भी दी कि इस यात्रा में आने वाले बाधाओं और प्रतिस्पर्धात्मक वैश्विक परिदृश्य को समझना होगा। उन्होंने युवाओं को सलाह दी कि वे विश्व के सर्वोत्तम मॉडलों से सीखें, लेकिन अपनी本土ी संस्कृति और मूल्यों को बनाए रखें। उन्होंने अंत में कहा कि 2047 का भारत वह भारत होगा जिसे आज के युवा आज की अपनी मेहनत, विचारों और संकल्पों से गढ़ेंगे। इसलिए, उन्हें आज से ही अपनी भूमिका स्पष्ट करनी चाहिए और देश के विकास की इस महायाना में सक्रिय रूप से हिस्सा लेना चाहिए।
सभा के समापन पर, डॉ. एल. मुरुगन ने युवाओं से वादा लिया कि वे इस संकल्प के साथ आगे बढ़ेंगे और 2047 तक विकसित भारत के सपने को हक़ीक़त में बदलने की दिशा में अटल भाव से काम करेंगे। इस भाषण ने उपस्थित युवाओं के बीच एक नई ऊर्जा और प्रेरणा का संचार किया, जिसने उन्हें भविष्य के दुनिया के सबसे शक्तिशाली और विकसित देशों में से एक बनाने की जिम्मेदारी संभालने के लिए तैयार किया।