प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के कार्यालय और 'उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग ने राष्ट्रीय अनुसंधान बुनियादी ढांचे तक पहुंच मजबूत करने के लिए 'स्टार्टअप इंडिया' और 'I-STEM' पोर्टलों के बीच एपीआई एकीकरण की शुरुआत की
प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के कार्यालय (PSA) और उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) ने 'स्टार्टअप इंडिया' और 'I-STEM' पोर्टलों के बीच एपीआई एकीकरण शुरू कर दिया है। इस पहल का उद्देश्य राष्ट्रीय अनुसंधान बुनियादी ढांचे तक पहुंच को मजबूत करना और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर को सुगम बनाना है।
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भारत की वैज्ञानिक और प्रौद्योगिकी नीतियों में एक महत्वपूर्ण बदलाव की शुरुआत हो गई है। प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के कार्यालय (PSA) और उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) ने मिलकर राष्ट्रीय अनुसंधान बुनियादी ढांचे तक पहुंच को और अधिक मजबूत करने के लिए एक नई तकनीकी पहल को अंजाम दिया है। इस पहल के तहत, देश के प्रमुख स्टार्टअप पोर्टल 'स्टार्टअप इंडिया' और राष्ट्रीय अनुसंधान संस्थानों का पोर्टल 'I-STEM' के बीच एप्लीकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस (API) एकीकरण (Integration) की शुरुआत की गई है।
इस नए एकीकरण का मुख्य उद्देश्य स्टार्टअप्स, उद्यमियों और रिसर्च संस्थानों के बीच की दूरी कम करना है। अब, स्टार्टअप्स बिना किसी जटिल प्रक्रिया के 'I-STEM' पोर्टल पर उपलब्ध नवीनतम अनुसंधान परिणामों, पेटेंट, टेक्नोलॉजी और विशेषज्ञ ज्ञान तक सीधे पहुंच पाएंगे। इससे टेक्नोलॉजी ट्रांसफर की प्रक्रिया तेज और सरल हो जाएगी, जिससे नए विचारों को व्यावसायिक उत्पादों में बदलने में लगे समय और लागत में कमी आएगी।
प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के कार्यालय के अनुसार, यह कदम भारत के 'नमस्ते स्टार्टअप' मिशन के अनुरूप है, जिसका लक्ष्य देश को एक वैश्विक प्रौद्योगिकी शक्ति बनाना है। 'I-STEM' पोर्टल पर देश के प्रमुख अनुसंधान संस्थानों, जैसे कि IITs, NITs और अन्य सरकारी विश्वविद्यालयों द्वारा किए गए शोध के नतीजे उपलब्ध हैं। पिछले कुछ वर्षों में, इन संस्थानों द्वारा किए गए शोध को बाजार में लागू करने की चुनौती का सामना करना पड़ रहा था, क्योंकि स्टार्टअप्स के पास इन तकनीकों तक पहुंच की सीमित माध्यम थे। नए API एकीकरण के जरिए, यह अडचण दूर की गई है।
उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) के अधिकारियों ने बताया कि यह एकीकरण डिजिटल इंडिया की दिशा में एक अहम कदम है। इससे स्टार्टअप्स को अपने उत्पादों को बेहतर बनाने के लिए आवश्यक वैज्ञानिक आधार की कमी पूरी करने में मदद मिलेगी। साथ ही, अनुसंधानकर्ताओं के लिए भी यह एक नया मार्ग है, क्योंकि वे अपने शोध को सीधे उद्योग जगत तक पहुंचा सकते हैं और उसकी व्यावहारिक उपयोगिता का पता लगा सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल भारत की स्टार्टअप इकोसिस्टम को और भी मजबूत करेगी। टेक्नोलॉजी-बेस्ड स्टार्टअप्स, जैसे कि एआई, बायोटेक, और एडवांस्ड मटेरियल्स क्षेत्र में काम करने वाले उद्यमियों के लिए यह एक बड़ी राहत है। अब वे 'स्टार्टअप इंडिया' के माध्यम से ही अपने शोध और विकास (R&D) की जरूरतों को पूरा कर पाएंगे, जिससे देश की अर्थव्यवस्था में नौकरियों के नए स्रोत बनने की उम्मीद है।
सरकार का यह संयुक्त प्रयास यह दर्शाता है कि विज्ञान, प्रौद्योगिकी और उद्यमिता के बीच एक मजबूत सहयोग का नेटवर्क बनाया जा रहा है। भविष्य में, इस एकीकरण को और विकसित करके अन्य डिजिटल सेवाओं से भी जोड़ा जा सकता है, जिससे भारत के स्टार्टअप्स वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम बन सकेंगे। इस प्रकार, 'स्टार्टअप इंडिया' और 'I-STEM' के बीच यह तकनीकी पुल देश के स्मार्ट गवर्नेंस और डिजिटल विकास के विज़न का एक प्रतीक है।