भारत की राष्ट्रपति कुरुक्षेत्र में स्वामी श्रद्धानंद जी के बलिदान शताब्दी समारोह में शामिल हुईं
भारत की राष्ट्रपति ने कुरुक्षेत्र में स्वामी श्रद्धानंद जी के बलिदान की शताब्दी पर आयोजित विशेष पूजा समारोह में भाग लिया, जहां उन्होंने शिक्षा और सेवा के क्षेत्र में उनके अमिट योगदान की प्रशंसा की।
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सोमवार को हरियाणा के ऐतिहासिक शहर कुरुक्षेत्र में एक गौरवशाली अवसर का आयोजन किया गया, जिसमें भारत की राष्ट्रपति ने स्वामी श्रद्धानंद जी के बलिदान की शताब्दी समारोह में शिरकत की। यह समारोह शिक्षा, धर्म और समाज सेवा के क्षेत्र में स्वामी जी के अमूल्य विरासत को याद करने के लिए आयोजित किया गया था। राष्ट्रपति महोदया ने इस पवित्र अवसर पर उपस्थित जनजाति, शिक्षाविदों और सांस्कृतिक व्यक्तित्वों के साथ मिलकर पूजा-अर्चना की, जिससे स्थल पर एक गहरे आध्यात्मिक और राष्ट्रभक्तिपूर्ण माहौल का निर्माण हुआ।
स्वामी श्रद्धानंद जी का जन्म 1856 में हुआ था और वे एक प्रखर राष्ट्रवादी शिक्षाविद थे, जिन्होंने 1918 में अपनी दृढ़ संकल्प और बलिदान के माध्यम से शिक्षा और सामाजिक सुधार के क्षेत्र में मार्गदर्शन किया था। उनके जीवन का प्रमुख उद्देश्य भारतीय संस्कृति और शिक्षा को आधुनिक रूप प्रदान करना था, जिसके लिए उन्होंने 'गुरुकुल' परंपरा को पुनर्जीवित किया और बाल-शिक्षा को प्राथमिकता दी। कुरुक्षेत्र में आयोजित इस शताब्दी समारोह में, राष्ट्रपति ने स्वामी जी के द्वारा किए गए शिक्षा व्यवस्था में सुधारों और सामाजिक एकता के प्रयासों की गहन प्रशंसा की।
समारोह के दौरान, राष्ट्रपति ने एक संवाददाता सम्मेलन के रूप में दिए गए संबोधन में बताया कि स्वामी श्रद्धानंद जी का जीवन एक ऐसे युग की प्रतिनिधित्व करता है जब भारत ने आत्मनिर्भरता और शिक्षा के जरिए राष्ट्र निर्माण की नींव रखी थी। उन्होंने कहा कि आज के युग में भी स्वामी जी के विचार, विशेष रूप से शिक्षा के माध्यम से युवा पीढ़ी को सशक्त बनाने की उनकी दृष्टि, अत्यंत प्रासंगिक है। उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की कि वे स्वामी जी के आदर्शों को अपनाएं और शिक्षा के क्षेत्र में नई ऊर्जा के साथ काम करें।
स्थानीय प्रशासन और सांस्कृतिक संगठनों ने इस इतिहासिक घटना के लिए विशेष व्यवस्था की थी। कुरुक्षेत्र के प्रमुख मंदिरों और शिक्षा संस्थानों में फूलों और दीयों से सजावट की गई, जिससे शहर को एक विशेष सौंदर्य प्राप्त हुआ। समारोह में हिस्सा लेने वालों में हरियाणा के मुख्यमंत्री, विधायक, जिलाधिकारी, पुलिस प्रशासन के अधिकारी और प्रमुख शिक्षाविद शामिल थे। सभी ने स्वामी श्रद्धानंद जी के प्रति सम्मान expressing करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की।
इस शताब्दी समारोह का प्रमुख उद्देश्य केवल याद करना नहीं, बल्कि स्वामी श्रद्धानंद जी के द्वारा शुरू की गई शिक्षा और सेवा की परंपरा को आगे बढ़ाना था। राष्ट्रपति की उपस्थिति ने इस समारोह को राष्ट्रीय महत्व प्रदान किया और यह संदेश दिया गया कि स्वामी जी का बलिदान और त्याग आज भी भारतीय समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है। कार्यक्रम के समापन के बाद, राष्ट्रपति ने स्थानीय बच्चों और शिक्षकों से संवाद किया, जहां उन्होंने युवाओं को कड़ी मेहनत और नैतिक मूल्यों के आधार पर आगे बढ़ने की सलाह दी। यह घटना कुरुक्षेत्र की इतिहास में एक नया पृष्ठ जोड़ती है, जहां शिक्षा और धर्म के समन्वय को फिर से जीवंत किया गया है।