भारत की राष्ट्रपति अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), बिलासपुर के प्रथम दीक्षांत समारोह में शामिल हुईं
भारत की राष्ट्रपति ने नई दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में आयोजित प्रथम दीक्षांत समारोह में भाग लिया। समारोह में चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में प्रवेश पाए नए छात्रों को सम्मानित किया गया।
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नई दिल्ली | भारतीय गणतंत्र की प्रथम महिला राष्ट्रपति ने बुधवार को नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), बिलासपुर के भव्य दीक्षांत समारोह में शामिल होकर अपने संदेश में चिकित्सा शिक्षा के विकास और देश की स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत बनाने की अपील की। यह समारोह संस्थान के इतिहास में इसकी स्थापना के बाद पहला औपचारिक दीक्षांत समारोह था, जिसमें चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में नए पदक और डिग्री प्राप्त करने वाले विशिष्ट छात्रों को सम्मानित किया गया।
राष्ट्रपति के द्वारा दी गई मुख्य भाषण में उलटें गया कि स्वास्थ्य प्रणाली किसी भी राष्ट्र की रीढ़ है और इसके मजबूत होने के लिए योग्य और दयालु चिकित्सकों की आवश्यकता होती है। उन्होंने नए चिकित्सकों को सलाह दी कि वे अपने करियर में न केवल तकनीकी हुनेश का विकास करें, बल्कि मनुष्यता और सेवा भाव को भी प्राथमिकता दें। राष्ट्रपति ने संस्थान की प्रशासनिक टीम और शिक्षकों की प्रशंसा की, जिन्होंने शानदार शैक्षणिक वातावरण तैयार करके छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने में सहायता की।
समारोह में उपस्थित अन्य अतिथियों में स्वास्थ्य मंत्रालय के उच्च अधिकारी, संस्थान के निदेशक, वरिष्ठ डॉक्टरों की एक बड़ी संख्या और देशभर से आने वाले अभिभावक शामिल थे। मौके पर छात्रों ने अपने संकल्प व्यक्त किए कि वे देश के दूरदराज के इलाकों में भी सेवा प्रदान करेंगे और स्वास्थ्य सेवाओं के समान वितरण के लक्ष्य को प्राप्त करने में अपना योगदान देंगे।
एम्स, बिलासपुर के प्रबंधन ने बताया कि यह पहला दीक्षांत समारोह संस्थान के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है, जो संस्थान के शैक्षणिक प्रयासों के आरंभिक सफल होने का प्रतीक है। समारोह के दौरान छात्रों को उनके प्रदर्शन के आधार पर विभिन्न पुरस्कार भी प्रदान किए गए। मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित राष्ट्रपति ने संस्थान के भविष्य के आशावादी नजरिए को भी रेखांकित किया और कहा कि आने वाले वर्षों में संस्थान देश के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक मानक तय करने की भूमिका निभाएगा।
समारोह के अंत में राष्ट्रपति ने समस्त स्नैट छात्रों को बधाई दी और उन्हें अपने नए चरण में सफलता की कामना की। इस अवसर पर संस्थान के परिसर में सुरक्षा व्यवस्था की पूर्ण तैयारी की गई थी और सभी अतिथियों का सम्मानजनक स्वागत किया गया। यह घटना न केवल संस्थान के लिए, बल्कि भारत की चिकित्सा शिक्षा प्रणाली के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी जा रही है, जो देश के स्वास्थ्य उद्योग में नए मानकों के निर्माण की दिशा में एक कदम माना गया।