दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्या योजना 2.0 का शुभारंभ
केंद्र एवं राज्य सरकार ने मिलकर दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्या योजना 2.0 को लागू किया, जिसका उद्देश्य ग्रामीण भारत में युवाओं और महिलाओं को आधुनिक कौशल से सशक्त बनाकर रोजगार के नए अवसर प्रदान करना है।
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पिछले कुछ वर्षों में दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्या योजना (DGKS) ने ग्रामीण क्षेत्रों में कौशल विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की थी, जिससे लाखों लोगों को स्वरोजगार और स्वरोजगार-उन्मुख प्रशिक्षण मिला। इस सफलता को देखते हुए केंद्र और राज्य सरकार ने योजना का पुनःसंरचनात्मक संस्करण, DGKS 2.0, पेश करने का निर्णय लिया। नई योजना का मुख्य फोकस डिजिटल साक्षरता, वैकल्पिक ऊर्जा, कृषि‑आधारित उद्यमिता, और जल‑संचालन तकनीकों जैसे भविष्य‑उन्मुख क्षेत्रों में प्रशिक्षण देना है। इसके तहत राज्य के 12 जिलों में 250 प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए जाएंगे, जहाँ मोबाइल लर्निंग यूनिट, ऑनलाइन मॉड्यूल और स्थानीय भाषा में सामग्री उपलब्ध होगी।
DGKS 2.0 में महिलाओं और शारीरिक रूप से विकलांग व्यक्तियों के लिए विशेष कोटेशन्स निर्धारित किए गए हैं, जिससे समावेशी विकास को बढ़ावा मिलेगा। योजना के तहत 1.5 करोड़ रुपये के केंद्रीय अनुदान के साथ-साथ राज्य की अतिरिक्त फंडिंग भी उपलब्ध कराई जाएगी। प्रशिक्षण के बाद प्रतिभागियों को प्रमाणित कौशल कार्ड प्रदान किया जाएगा, जिससे उन्हें सार्वजनिक रोजगार योजनाओं और निजी कंपनियों के साथ सीधे जुड़ने में सुविधा होगी। योजना के कार्यान्वयन में राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (NSDC), भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) के सहयोगी केंद्र, तथा स्थानीय स्वयंसेवी संगठनों को प्रमुख भूमिका निभाने के लिए आमंत्रित किया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि DGKS 2.0 ग्रामीण अर्थव्यवस्था को विविधता प्रदान करके बेरोजगारी को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह पहल न केवल युवा वर्ग को स्वरोजगार के लिए तैयार करेगी, बल्कि कृषि मूल्य श्रृंखला में नवाचार को भी प्रोत्साहित करेगी, जिससे ग्रामीण भारत की समग्र विकास दिशा में सकारात्मक बदलाव आएगा।