وزیراعظم نے گاندھی یادگار میں منعقدہ نمازِ صبح میں شرکت کی اور باپو کے ابدی پیغام کو یاد کیا
صدر اعظم نے گاندھی یاد میں منعقد شدہ دعا جماعت میں حصہ لے کر مہاتما گاندھی کے ابدی پیغام اور ان کے زندگی سے تحریک حاصل کی، جو جدید بھارت کے لیے معنی خیز ہے۔
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शनिवार, 3 अक्टूबर, 2026 को, राजधानी के शांत और पवित्र माहौल में एक विशेष प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया, जिसमें प्रधानमंत्री ने भाग लिया। शनिवार، 3 اکتوبر، 2026 کو، دارالحکومت کے پرسکون اور مقدس ماحول میں ایک خاص دعا کی جماعت کا انعقاد کیا گیا، جس میں وزیر اعظم نے حصہ لیا۔
यह कार्यक्रम गांधी स्मृति परिसर में आयोजित किया गया, जो देश भर के लाखों साधारण नागरिकों के लिए एक आध्यात्मिक और राष्ट्रीय चेतना का केंद्र रहा। یہ پروگرام گاندھی یادگار کمپس میں منعقد کیا گیا، جو ملک بھر کے لاکھوں عام شہریوں کے لیے ایک روحانی اور قومی شعور کا مرکز رہا۔
प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर उपस्थित भीड़ को संबोधित करते हुए कहा कि महात्मा गांधी के विचार आज भी समान रूप से प्रासंगिक हैं और वे हमें शांति, सहिष्णुता और सेवा की राह पर चलने का प्रेरित करते हैं। وزیر اعظم نے اس موقع پر حاضر بھیڑ کو مخاطب کرتے ہوئے کہا کہ مہاتما گاندھی کے خیالات آج بھی بالکل اسی طرح متعلقہ ہیں اور وہ ہمیں امن، برداشت اور خدمت کے راستے پر چلنے کی تحریک دیتے ہیں۔
प्रार्थना सभा के दौरान, प्रधानमंत्री ने बापू के शाश्वत संदेश को याद करते हुए उल्लेख किया कि गांधी जी की जीवन यात्रा केवल एक व्यक्तिगत क्रांति नहीं थी, बल्कि यह एक ऐसी सामाजिक और नैतिक क्रांति थी जिसने पूरी दुनिया को प्रभावित किया। دعا کی جماعت کے دوران، وزیر اعظم نے بابو کے ابدی پیغام کو یاد کرتے ہوئے ذکر کیا کہ گاندھی جی کی زندگی کا سفر صرف ایک ذاتی انقلاب نہیں تھا، بلکہ یہ ایک ایسی سماجی اور اخلاقی انقلاب تھا جس نے پوری دنیا کو متاثر کیا۔
उन्होंने कहा, "गांधी के विचारों ने हमें सिखाया है कि सत्य और अहिंसा केवल शब्द नहीं, बल्कि एक जीवनशैली है। आज के जटिल दौर में, जब विश्व युद्धों और वैधता के संघर्षों से जूझ रहा है, तब बापू का संदेश हमें अंतर्राष्ट्रीय शांति और आपसी सम्मान के लिए एक मार्गदर्शक प्रकाश देता है।" انہوں نے کہا، "گاندھی کے خیالات نے ہمیں سکھایا ہے کہ سچ اور غیر تشدد صرف الفاظ نہیں، بلکہ ایک طرزِ زندگی ہے۔ آج کے پیچیدہ دور میں، جب دنیا جنگوں اور قانونی جدوجہد سے دوچار ہے، بابو کا پیغام ہمیں بین الاقوامی امن اور باہمی احترام کے لیے ایک رہنمائی روشنی دیتا ہے۔"
गांधी स्मृति में उपस्थित हजारों श्रद्धालुओं और आम जनता ने इस अवसर पर एक साथ आकर अपने नेतृत्व और विचारों का सम्मान किया। گاندھی یادگار میں موجود ہزاروں عقیدت مند اور عام عوام نے اس موقع پر ایک ساتھ آ کر اپنے قیادت اور خیالات کا احترام کیا۔
प्रार्थना सभा में न केवल धार्मिक अनुष्ठान हुए, बल्कि गांधी जी की जीवन कथा से जुड़े ऐतिहासिक तथ्यों और उनके प्रमुख भाषणों के अंशों को भी पढ़कर सुनाया गया। دعا کی جماعت میں نہ صرف مذہبی رسومات ہوئیں، بلکہ گاندھی جی کی زندگی کی کہانی سے جڑے تاریخی حقائق اور ان کے اہم خطبات کے اقتباسات بھی پڑھ کر سنائے گئے۔
प्रधानमंत्री ने इस मौके पर यह भी सुनिश्चित किया कि आगामी पीढ़ियों तक यह संदेश पहुंचे, ताकि वे गांधीवादी मूल्यों को अपने दैनिक जीवन में शामिल कर सकें। وزیر اعظم نے اس موقع پر یہ بھی یقین دہانی کرائی کہ یہ پیغام آنے والی نسلوں تک پہنچے، تاکہ وہ گاندھیانہ اقدار کو اپنے روزمرہ کے زندگی میں شامل کر سکیں۔
कार्यक्रम के समापन के बाद, प्रधानमंत्री ने गांधी स्मृति के विभिन्न प्रदर्शनी कक्षों का निरीक्षण किया, जहां महात्मा गांधी के व्यक्तिगत वस्तुओं, चिट्ठियों और ऐतिहासिक तस्वीरों को प्रदर्शित किया गया है। پروگرام کے اختتام کے بعد، وزیر اعظم نے گاندھی یادگار کے مختلف نمائش کے کمروں کا معائنہ کیا، جہاں مہاتما گاندھی کی ذاتی اشیاء، خطوط اور تاریخی تصاویر دکھائی گئی ہیں۔
उन्होंने वहां मौजूद संरक्षकों और कर्मचारियों को प्रोत्साहन दिया और कहा कि ऐतिहासिक स्थलों की देखभाल करना राष्ट्रीय कर्तव्य है, क्योंकि ये स्थल हमें हमारे विरसों और पहचान से जोड़े रखते हैं। انہوں نے وہاں موجود محافظوں اور ملازمین کو حوصلہ افزائی کی اور کہا کہ تاریخی مقامات کی دیکھ بھال کرنا قومی فرض ہے، کیونکہ یہ مقامات ہمیں ہمارے ورثے اور شناخت سے جوڑے رکھتے ہیں۔
यह प्रार्थना सभा न केवल एक धार्मिक समारोह था, बल्कि यह एक राष्ट्रीय एकता का प्रतीक भी था। یہ دعا کی جماعت نہ صرف ایک مذہبی تقریب تھی، بلکہ یہ ایک قومی اتحاد کا بھی علامت تھی۔
इस दौरान कई विद्वानों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी अपने विचार रखे, जिनमें गांधी के विचारों की आधुनिक दुनिया में उपयुक्तता पर बहस शामिल थी। اس دوران کئی علماء اور سماجی کارکنوں نے بھی اپنے خیالات پیش کیے، جن میں گاندھی کے خیالات کی جدید دنیا میں مطابقت پر بحث شامل تھی۔
प्रधानमंत्री के उपस्थित होने ने इस कार्यक्रम को और भी गंभीरता और महत्व प्रदान किया। وزیر اعظم کی موجودگی نے اس پروگرام کو مزید سنجیدگی اور اہمیت دی۔
इस घटनाक्रम ने पुनः स्पष्ट किया कि चाहे समय कैसे भी बदल जाए, महात्मा गांधी के विचारों की प्रासंगिकता कभी कम नहीं हुई है और वे भारतीय जनता के लिए एक स्थायी प्रेरणा स्रोत बनाए रहेंगे। اس واقعے نے دوبارہ واضح کیا کہ چاہے وقت کیسے بھی بدل جائے، مہاتما گاندھی کے خیالات کی مطابقت کبھی کم نہیں ہوئی ہے اور وہ بھارتی عوام کے لیے ایک مستقل تحریک کا ذریعہ بنے رہیں گے۔
इस प्रकार, गांधी स्मृति में आयोजित यह प्रार्थना सभा एक ऐतिहासिक दिन के रूप में याद की जाएगी, जिसमें देश के सर्वोच्च नेतृत्व ने जनता के साथ मिलकर बापू के विचारों को नवीनतम रूप में समझने का प्रयास किया। اس طرح، گاندھی یادگار میں منعقد یہ دعا کی جماعت ایک تاریخی دن کے طور پر یاد کی جائے گی، جس میں ملک کے اعلیٰ قیادت نے عوام کے ساتھ مل کر بابو کے خیالات کو جدید ترین شکل میں سمجھنے کی کوشش کی۔