संसद परिसर के प्रेरणा स्थल पर रानी चेन्नम्मा की जयंती और 202वां विजयोत्सव भव्यता के साथ मनाया गया
संसद परिसर के प्रेरणा स्थल पर 23 अक्टूबर, 2026 को रानी चेन्नम्मा की जयंती और 202वां विजयोत्सव भव्य श्रद्धांजलि के साथ मनाया गया, जहाँ कई प्रतिष्ठित हस्तियों ने रानी के धार्मिक व सामाजिक कार्यों को याद किया।
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23 अक्टूबर, 2026, शुक्रवार को नई दिल्ली के संसद परिसर स्थित 'प्रेरणा' केंद्र पर एक संयोगपूर्ण और भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें कर्नाटक की सर्वमान्य सेनापति रानी चेन्नम्मा की जयंती और 202वां विजयोत्सव उत्सव मनाया गया। यह कार्यक्रम न केवल एक धार्मिक उत्सव था, बल्कि इसमें रानी की अतुलनीय साहसिकता और उनके सामाजिक समरसता के सन्देशों को नई ऊर्जा प्रदान करने का प्रयास भी शामिल था।
संध्या के समय प्रेरणा स्थल पर सजी-संवारी गई पूजा स्थली पर श्रद्धांजलि सभा का आरंभ हुआ। इस अवसर पर मौजूद अतिथियों ने रानी चेन्नम्मा के प्रति गहरा श्रद्धांजलि प्रकट की। कार्यक्रम के मुख्य अतिथियों में स्थानीय राजनेता, समाजसेवियों और सांस्कृतिक विभाग के उच्चाधिकारी शामिल थे, जिनमें से कई ने सीधे रानी के जीवन पर आधारित वक्तव्य रखे।they ने रानी के उस दृढ़ संकल्प को याद किया जिसने उन्हें आधुनिक काल के पुरातात्विक और सांस्कृतिक संरक्षण के लिए प्रेरित किया था।
202वां विजयोत्सव इस वर्ष विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना गया, क्योंकि यह रानी की स्थापना के 200 वर्षों के पारियों से परे का प्रतीक है। पूजा अर्चना के दौरान विशेष रूप से रानी द्वारा स्थापित मंदिरों और संस्थानों के पुनर्निर्माण व संरक्षण के प्रस्तावों पर चर्चा की गई। कार्यक्रम में एक विशेष दीप प्रज्वलन समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न वर्गों से आने वाले लोगों ने एक-दूसरे के साथ मिलकर दीपक जलाए, जो सामाजिक एकता और धार्मिक सहिष्णुता का प्रतीक था।
प्रेरणा केंद्र के प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवा पीढ़ी को रानी चेन्नम्मा के जीवन और कार्यों से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि रानी केवल एक राजनीतिक नेता नहीं थीं, बल्कि वे एक असाधारण कलाकार, संगीतकार और समाज सुधारक थीं, जिन्होंने कर्नाटक की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित किया। इस वर्ष के आयोजन में तकनीकी नवाचार भी देखे गए, जिनमें वास्तविकता-आधारित प्रदर्शनों के माध्यम से रानी के जीवन के प्रमुख क्षणों को दर्शाया गया, जिससे दर्शकों को उनकी यात्रा को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिली।
कार्यक्रम के अंत में, उपस्थित अतिथियों ने रानी की खटिया पर पुष्प अर्पित किए और शांतिपूर्ण स्वर में प्रार्थना की। इस अवसर पर एक संयुक्त बयान जारी किया गया, जिसमें कहा गया कि संसद परिसर में इस कार्यक्रम का आयोजन यह दर्शाता है कि स्वतंत्रता पुरवर्त काल में भी धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत की रक्षा के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सहयोग और एकजुटता बनी हुई है। यह सभा रणी चेन्नम्मा के 202वें विजयोत्सव को समर्पित इस वर्ष के सबसे प्रभावशाली सांस्कृतिक घटनाओं में से एक के रूप में याद की जाएगी, जो आने वाले वर्षों के लिए प्रेरणा का स्रोत होगी।