जयगोपाल गारोडिया हिंदू विद्यालय के स्वर्ण जयंती समारोह के दौरान प्रधानमंत्री के संबोधन का मूल पाठ
जयगोपाल गारोडिया हिंदू विद्यालय के स्वर्ण जयंती समारोह के अवसर पर प्रधानमंत्री ने एक विशेष भाषण दिया, जिसमें उन्होंने शिक्षा के महत्व और राष्ट्र निर्माण में विद्यालयों की भूमिका पर प्रकाश डाला।
Journalism India··0 व्यूज़·3 मिनट पढ़ें
11 अक्टूबर 2026 को, शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण दिन था जब जयगोपाल गारोडिया हिंदू विद्यालय ने अपने स्वर्ण जयंती वर्षगांठ के अवसर पर एक भव्य समारोह का आयोजन किया। इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री का विशेष सहभागिता और उनका संबोधन युवाओं और शिक्षाविदों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना। विद्यालय की प्रांगण में होने वाले इस समारोह में देशभर से आए शिक्षकों, छात्रों और माता-पिता की भावुक उपस्थिति देखने को मिली, जिसने इस अवसर को और भी विशेष बना दिया।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत में विद्यालय की स्थापना के पीछे के वैचारिक मूल्यों और दूरदर्शिता को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने उल्लेख किया कि पिछले पांच दशकों में जयगोपाल गारोडिया हिंदू विद्यालय ने न केवल ज्ञान का प्रसार किया है, बल्कि राष्ट्र के अंतर्निहित संस्कारों और मूल्यों को आकार देने में भी अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल पाठ्यपुस्तकीय ज्ञान सीखना नहीं है, बल्कि चरित्र निर्माण करना है, जो कि इस विद्यालय के दृष्टिकोण की पक्की गवाही है।
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में आधुनिक चुनौतियों और तंत्र-तंत्र में शिक्षा की भूमिका पर भी गहराई से चर्चा की। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे प्रौद्योलिकी के इस दौर में अपनी विचारधारा को बलवतम बनाएं और देश की अर्थव्यवस्था के विकास में योगदान दें। उन्होंने विशेष रूप से विज्ञान, तकनीक और कला के क्षेत्रों में छात्रों की उपलब्धियों की सराहना की, जो कि विद्यालय के शिक्षण पद्धति की सफलता का प्रमाण है।
समारोह के दौरान, प्रधानमंत्री ने स्वर्ण जयंتی के उपलक्ष्य में विद्यालय के कुछ वरिष्ठ शिक्षकों और प्रतिभाशाली छात्रों को सम्मानित भी किया। यह पल समारोह के सबसे स्मरणीय क्षणों में से एक था, जब सादर अभिवादन और सम्मान के आदान-प्रदान ने शैक्षिक मंडली में गर्व की भावना को जगाया। प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसे संस्थाए ही हैं जो समाज को मजबूत आधार प्रदान करती हैं, और इस विद्यालय का सफर इस बात का उदाहरण है कि निरंतर प्रयास और समर्पण से क्या-क्या सफलता हासिल की जा सकती है।
समारोह का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ, जिसमें सभी उपस्थित प्रतिभागियों ने एकजुटता से हिस्सा लिया। इस ऐतिहासिक दिन को याद रखते हुए, जयगोपाल गारोडिया हिंदू विद्यालय ने घोषणा की कि वह अगले दशकों में भी शिक्षा के क्षेत्र में नए मानदंड स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध रहेगा। प्रधानमंत्री के इस संबोधन ने न केवल विद्यालय के निकटतम भविष्य के लिए प्रेरणा दी, बल्कि यह संदेश भी दिया गया कि शिक्षा ही वह दौलत है जो कभी मिट्टी नहीं होती। इस स्वर्ण जयंती समारोह ने एक बार फिर से सिद्ध कर दिया कि ज्ञान की ज्योति जब सही दिशा में प्रज्वलित होती है, तो वह पूरे समाज को उजाला प्रदान करती है।