66वें राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय पाठ्यक्रम के संकाय और पाठ्यक्रम प्रतिभागियों ने राष्ट्रपति से मुलाकात की
66वें राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय (NDM) पाठ्यक्रम के संकाय सदस्य और प्रतिभागी ने राष्ट्रपति से मुलाकात की, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा और युवाओं के नेतृत्व विकास पर चर्चा हुई।
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राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक घटनाक्रम दर्ज हुआ, जब 66वें राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय (NDM) पाठ्यक्रम के संकाय सदस्यों और पाठ्यक्रम प्रतिभागियों ने राष्ट्रपति से मुलाकात की। यह मुलाकात न केवल संस्थागत समारोहों का हिस्सा थी, बल्कि युवा अधिकारियों और शिक्षकों के बीच राष्ट्रीय दृष्टिकोण को समझने के लिए एक अनमोल अवसर साबित हुई। इस दौरान, प्रतिभागियों ने राष्ट्रपति से देश की रक्षा नीतियों, आधुनिक युद्धकलाओं और डिजिटल युग में सैन्य तैयारियों पर विचार-विमर्श किया।
राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय का पाठ्यक्रम भारतीय सेना और अन्य रक्षा बलों के लिए प्रतिभाशाली अधिकारियों को तैयार करने की दिशा में एक लंबे और कठोर प्रक्रिया का प्रतीक है। 66वां पाठ्यक्रम उसकी अनुभवी श्रृंखला का हिस्सा है, जिसमें संकाय सदस्य अत्यंत अनुभवी सैनिकों और शिक्षाविदों से मिलकर बने होते हैं, जो युवा प्रतिभागीوں को न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक और नैतिक दृढ़ता भी प्रदान करते हैं। इस मुलाकात में, राष्ट्रपति ने प्रतिभागियों को देश की संप्रभुता और अखंडता की रक्षा के लिए समर्पित रहने की प्रेरणा दी।
संकाय के प्रमुख और पाठ्यक्रम के दल ने राष्ट्रपति को पाठ्यक्रम की प्रगति, प्रशिक्षण विधियों और हाल के अपनाने गए नवीन तकनीकों के बारे में विस्तृत रूप से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि आधुनिक युद्ध के मैदान में बदलाव को देखते हुए, पाठ्यक्रम में ड्रोन तकनीक, साइबर सुरक्षा और हाइब्रिड युद्ध जैसे विषयों पर विशेष जोर दिया जा रहा है। राष्ट्रपति ने इन पहलों को सराहते हुए बताया कि भारतीय रक्षा बलों का भविष्य इन युवाओं और शिक्षकों के कंधों पर है, और उन्हें हमेशा नवीनतम विश्व प्रवृत्तियों से जुड़े रहना चाहिए।
यह मुलाकात स्थानीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बनी, क्योंकि यह दर्शाता है कि देश की सर्वोच्च नागरिक पदस्थ व्यक्ति रक्षा शिक्षा और संस्थागत विकास को कितनी गंभीरता से लेते हैं। दिल्ली के इस महत्वपूर्ण संस्थान में हुई यह बैठक, 66वें पाठ्यक्रम के प्रतिभागियों के लिए उनके करियर की शुरुआत में ही एक बड़ा प्रेरणादायक क्षण रहा। प्रतिभागियों ने राष्ट्रपति से अपने सवाल पूछे और उनके उत्तरों से उन्हें देश की बड़ी चित्रा का स्पष्ट अहसास हुआ।
राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय की इस परंपरा को आगे बढ़ाते हुए, संकाय ने घोषणा की कि वे राष्ट्रपति के मार्गदर्शन को अपने प्रशिक्षण के भाग के रूप में अपनाएंगे। यह घटना भारतीय सेना के भीतर एकजुटता और राष्ट्रीय सेवा भाव को और मजबूत करने में सहायक साबित होगी। 66वें पाठ्यक्रम के सभी संकाय सदस्य और पाठ्यक्रम प्रतिभागी अब इस मुलाकात के अनुभव को अपने आने वाले यात्रा में सबसे बड़े सम्मान और ज़िम्मेदारी के रूप में लेते हुए आगे बढ़ रहे हैं, ताकि वे देश की रक्षा में अपनी सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकें।